वैश्वीकरण राष्ट्र प्रेम एवं स्वदेश की भावना को आघात पहुँचा रहा है। लोग विदेशी वस्तुओं का उपभोग करना शान समझते है एवं देशी वस्तुओं को घटिया एवं तिरस्कार योग समझते हैं। He understands each individual soo fantastically and correctly that we do not do ourselves. He provides both equally mental https://miloagikm.humor-blog.com/32376594/the-single-best-strategy-to-use-for-narayan